When you are considered as a molester

कभी-कभी आप उस चीज के लिए भी दोषी होते हैं। जो आपने कभी नहीं की और यह होता सिर्फ आपके संगत की वजह से।
 यह बात कुछ 1 साल पहले की है। मैं और मेरा एक दोस्त शाम को टहलने के लिए निकले, साथ में कुछ मेडिकल के फॉर्म भरने थे तो हमने सोचा बाजार चलते हैं, पहले cyber cafe में फॉर्म फिलअप करके बाद में घूम लेंगे।
जैसा कि सबको पता है , पुरुष और नारी generally एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं। यह एक जायज प्रक्रिया है। रास्ते में आते  जाते लोगों की एक दूसरे से नजरें मिलती हैं, कभी-कभी कुछ लोग ज्यादा भा जाते हैं तो कुछ लोग उन्हें ध्यान से देखने लगते हैं। अब जो बायोलॉजिकल है उसे रोक नहीं सकते हैं।
लेकिन देखने के भी कई तरीके होते हैं एक  decent तरीका होता है और एक गिद्धों जैसी, हम सभी लोग एक दूसरे का ध्यान पाने के लिए कुछ ना कुछ करते हैं।  सजना, सवरना ,अच्छा दिखना इत्यादि। इसका यह मतलब नहीं कि कोई किसी को अपने बाप का माल समझे।
 तो हम साइबर कैफे से फॉर्म फिल करके वापस लौट रहे थे। हम परीक्षा से जुडी बातें करते हुए आगे बढ़ रहे थे तो पीछे से कुछ लड़कियां आ रही थी।  तभी हमारे सामने सड़क के किनारे से सटे हुए smartphone की दुकान से दो लड़कियां निकली हमारी नजर उन पर पड़ी , क्योंकि रास्ता सकरा था इसलिए मैंने सोचा कि हम किनारे हो लेते हैं। इतने में मैं किनारे होने ही वाला था की मेरा दोस्त तेजी से आगे निकलते हुए उस सामने आ रही लड़की के बहुत करीब से गुजरा। मुझे यह बात कुछ समझ में नहीं आई कि अचानक इसे क्या हो गया। थोड़ी देर 10 कदम आगे चलने के बाद मैं जब अपने दोस्त के पास पहुंचा तो मैंने पूछा कि तुमने अभी क्या किया ? तो उसने सफाई देते हुए कहा की रास्ता सकरा था इसलिए सोचा जल्दी से निकल जाऊं। मैंने कहा ऐसा लगा तो नहीं कि तुम वास्तव में यह करना चाहते थे, या फिर तुम उस लड़की को जानबूझकर कंधे से लड़ाना चाहते थे। क्योंकि वह इससे छोटी-छोटी हरकतें पहले कर चुका था जो नजरअंदाज की जा सकती थी। पर उसके इस हरकत पर मैं थोड़े गुस्से में आ चुका था। इतने में पीछे से एक आदमी आया, आते ही मेरे दोस्त को डांटने लगा और मेरे दोस्त को कहा कि जैसे तुमने किया है इसके लिए तुम्हें जेल और पुलिस केस हो सकता है। यह ऐसा मामला है जिसमें तुम बहुत जल्दी अंदर हो सकते हो। इस पर दोस्त होने के नाते मैंने बचाव करना चाहा तो उस आदमी ने अपने पत्रकार होने का धौंस दिखाते हुए मुझसे भी कहा कि तुम भी उसका साथ दे रहे हो। क्योंकि मुझे ठीक से पता नहीं था कि उसने वास्तव में ऐसा किया बस केवल शक था। इसलिए हम बात को आगे ना बढ़ाते हुए मामला शांत करके वहां से वापस रूम पर आने लगे। मुझे सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात का लगा कि जो चीज़ मैंने अपनी लाइफ में कभी नहीं किया, किसी लड़की को घूरकर तक नहीं देखा। उस चीज के लिए कोई दूसरा इंसान मुझे समझा कर चला गया जो मैं दूसरों को समझाता था। और उसी दिन से मैंने अपने दोस्त से यह तय किया कि अगर मेरे साथ घूमना है या  मेरे साथ कहीं भी जाओ तो संभलकर और इंसानों की तरह चलो। देखना बुरी बात नहीं, मुझे नहीं लगता किसी भी लड़की को सिर्फ देखने से बुरा लग जाता होगा। जैसा मैंने पहले भी कहा सभी लोग आकर्षण पाना चाहते हैं और अगर आप उस बात का गलत मतलब निकाल कर उसे हवस भरी नजरों और गिद्धों जैसी नजरों से देखेंगे तो उसे जरूर बुरा लगेगा।
आपके अधिकार वहीं तक है जहां से दूसरों के अधिकार शुरू होते है। तो बेहतर है कि सभी लोग अपने अपने दायरे में रहें। इस बार मैंने यह भी सीखा कि आपने भले से कभी कुछ ना किया पर अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ हैं जो ऐसी हरकतें करता है और आप शांत रहते हैं तो आप भी उस हरकत में शामिल लोगों में हैं। किसी को कोई मतलब नहीं कि आप life में क्या है, कैसे हैं वह आपको वैसे ही ट्रीट करेंगे जैसे आपके साथ का शक्स होगा। शायद इसीलिए कहते हैं की संगत का बहुत असर पड़ता है। 
यह बात समझने योग्य है कि मेल फीमेल इंटरेक्शन और मोलेस्टेशन के बीच  की रेखा बहुत पतली होती है। आपके एक कदम इधर-उधर होने से सीधे आपके पर्सनालिटी पर असर पड़ता सकता है तो सामंजस्य बहुत जरूरी है। फिलहाल मैं कहना चाहूंगा कि सब को सब कुछ पता होता है। क्या गलत है, क्या सही यह हम बचपन से ही जानते हैं। जहां तक मुझे लगता है हर हरकत सोची समझी गई होती है। reflex action जैसी चीजें बहुत कम और emergency के वक्त ही होते हैं। तो कोई यह कह के नहीं बच सकता कि गलती से हो गई यह जुबान फिसल गई। यह सब बातें एक पर्दा है अपनी करतूतों को ढकने के लिए।
फिलहाल मेरे दोस्त ने उसके बाद से ऐसा कभी कुछ नहीं किया
# be aware 

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